🌟 जीवन में सफलता और सुख के लिए — सरल उपाय
यहाँ आसान और प्रभावी कार्य दिए गए हैं आप इन्हें घर पर आसानी से कर सकते हैं और नियमित रूप से करने से 100%लाभ मिलता है।
एकादशी व्रत, पूर्णिमा उपाय, हनुमान जी ज्योत, जीवन में तरक्की, लक्ष्मी कृपा, धन प्राप्ति उपाय, सरल टोटके, भगवते वासुदेवाय, सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा1️⃣ एकादशी का व्रत और संकल्प
क्या करना है
- हर महीने **दो एकादशियां** रखें — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।
- भगवान विष्णु की पूजा करें या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।
- यदि व्रत कठिन लगे तो संकल्प लें: उस दिन अनाज न खाएँ और झूठ/छल-कपट न करें। (फलों, ड्राई फ्रूट, दूध, जूस ले सकते हैं)
- एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें — यह मन को शुद्ध करती है और संकल्प को मजबूत बनाती है।
2️⃣ पूर्णिमा पर बंदनवार, बंदरवाल (तोरण) लगाना
क्या करना है
- हर पूर्णिमा की सुबह स्नान के बाद अपने घर के मुख्य द्वार और किचन के द्वार पर बंदनवार लगाएँ।
- बंदनवार आम के पत्तों या कनेर के पत्तों से बनाएं और लाल मोली/कलावा से बाँधें।
- पुराना बंदनवार उतारकर जल प्रवाह में छोड़ दें या किसी पेड़ की जड़ में डाल दें — वह सूखकर खाद बन जाएगा।
- नियमितता से करने पर घर में मां लक्ष्मी की कृपा आती है और सुख-समृद्धि बढ़ती है।
3️⃣ हनुमान जी की अंगारी वाली ज्योत (पूर्णिमा पर)
कदम-दर-कदम विधि
- गाय के गोबर का उपला लें और उसे गैस/आंच पर जला कर अंगारी तैयार करें (जब वह सुलग कर धुआँ दे रहा हो)।
- मंदिर में साफ जगह पर पत्थर रखकर हनुमान जी की फोटो/प्रतिमा रखें और एक लंबी बाती का दीपक जलाएँ।
- अंगारी (गोबर उपला) को दीपक की लौ से प्रज्वलित करें। इसके ऊपर धीरे-धीरे घी डालें — आग उठकर तेज हो जाएगी।
- अंगारी के ऊपर छोटा सा गुड़ की मीठी रोटी रखें और फिर से घी डालकर भोग अर्पित करें।
- साथ में सुंदरकांड का पाठ करें या कम से कम 5 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- यदि पूरा परिवार मिलकर करे तो यह श्रेष्ठ है — नहीं तो घर का मुखिया या स्त्री इसे नियमित करें।
🌸 दुख दूर करने के श्रीकृष्ण उपाय 🌸
✨ दूसरा उपाय – बांसुरी अर्पण
🪔 मुख्य सार
इन सब कार्यों को विस्वास के नियमित रूप से करने से Blog Post अनुसार ग्रह-नक्षत्र शांत होते हैं, नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और घर पर समृद्धि व सुरक्षा आती है — हनुमान जी का संरक्षण बना रहता है।
बृहस्पति को मजबूत करें → मंदिर/गुरुद्वारे में जाकर सफाई सेवा करें।
ॐ पितृदेवाय विद्महे
जगत् धारिण्ये धीमहि ।
तन्नः पितृ प्रचोदयात् ॥
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